Wednesday, 14 March 2012

स्‍वागतम्

आज बुधवार 14 मार्च 2012 से ब्‍लाग-स्‍थल का शुभारंभ  करते हुए मैं पाठकगण, मित्रों  एवं हितैषी बंधुओं का स्‍वागत करता हूं।

इस पन्‍ने पर आत्‍मविकास एवं परामनोविज्ञान जैसे विषयों पर चर्चा करने के साथ साथ अपनी मौलिक हास्‍य रचनाएं, कविताएं, गीत तथा ललित निबंध भी प्रस्‍तुत करता रहूंगा।

अपने संपूर्ण सेवाकाल में राजभाषा से जुड़ा रहा हूं, अत: हिंदी में बातचीत करने के अतिरिक्‍त गाहे-बगाहे अंग्रेजी में भी कलम चलाने का प्रयास रहेगा, बेशक उस पर मेरी पकड़ हिंदी जितनी मजबूत नहीं है। पंजाबी मेरी मातृभाषा है तथा गुजराती की कामचलाऊ जानकारी रखता हूं। मन में हिलोर उठी तो इन भाषाओं को भी अभिव्‍यक्ति का माध्‍यम बनाऊंगा।

मूलत: बावल (हरियाणा) से हूं, अब स्‍थायी निवास पंचकूला में है अत: बात में हरियाणवी अक्‍खड़पन झलके तो इसे प्राकृतिक समझिएगा।

हरियाणवी भाषा में अपने एक टुकड़े के साथ आज की बात समाप्‍त करता हूं:--

मत लिकड़ घामड़ा माहें पिंघल जावैगी
न्‍हावण लागी पाणी मां रल जावैगी
तैं छोरी सुथरी गुड़ की भेली जैसी
तनै पड़ोसियां की भैंस निगल जावैगी

(शाम लाल मेहता)